वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
प्रसूताओं की निगरानी रखने वाला झोला छाप डॉक्टर गिरफ्तार
कोलकाता। गोसाबा स्थित पाठानखाली पंचायत में जारी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अब पुलिस की रडार पर आया है इलाके का एक झोलाछाप डॉक्टर जिसकी पहचान रहमतुल्ला मोल्ला की रूप में हुई हैं। रहमतुल्ला खुद को चिकित्सक बताकर नर्सिंग होम भी चला रहा था। आरोप है कि इसी नर्सिंग होम की मोहर और पेड का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार किए गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रहमतुल्ला मोल्ला सोनाखाली रामचंद्रपुर इलाके में स्थानीय स्तर पर झोलाछाप डॉक्टर के तौर पर वर्षों से सक्रिय था। वह आसपास की गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी करता था कि किसका कब प्रसव होगा और कौन कहां भर्ती होंगी। इन जानकारियों का उपयोग किया जाता था फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार करने में। इस घोटाले में पहले ही पाठानखाली पंचायत का अस्थायी कर्मचारी गौतम सरदार गिरफ्तार हो चुका है। पूछताछ में गौतम ने कबूल किया कि वह रहमतुल्ला से सूचनाएं लेकर फर्जी दस्तावेज बनवाता था। नर्सिंग होम की चि_ी में बच्चे के जन्म की तारीख और अन्य जानकारियां दर्ज कर प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे, जिनका बाद में सरकारी रिकॉर्ड में उपयोग होता था। अब इस मामले में सिर्फ जिला पुलिस ही नहीं, बल्कि कोलकाता पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
पुलिस को शक है कि यह कोई स्थानीय जाल नहीं, बल्कि व्यापक स्तर का दस्तावेज फर्जीवाड़ा रैकेट है, जो एक से अधिक जिलों में फैला हो सकता है। पुलिस ने रहमतुल्ला को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने पासपोर्ट में झूठे जन्म प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में सामने आया कि सिर्फ पाठानखाली ग्राम पंचायत से ही करीब 3,500 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इसी जांच के दौरान गौतम सरदार और उसके जरिए रहमतुल्ला मोल्ला का नाम सामने आया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं? क्या पंचायत या स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल हैं? बड़े पैमाने पर सरकारी कागजातों की फर्जीवाड़े की यह घटना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है।
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं और कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सवाल उठता है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा होते हुए भी प्रशासनिक तंत्र लंबे समय तक कैसे अनजान रहा? फिलहाल, पुलिस इस पूरे घोटाले की परतें खोलने में जुटी है।